Forged NHM Selection List Scam in J&K: EOW Files Case for Cheating and Cyber Fraud

थाईलैंड में नौकरी का दिया झांसा, लाओस में जबरन कराया साइबर फ्रॉड; मुंबई क्राइम ब्रांच ने 2 लोगों को किया गरफ्तार

Titiksha Srivastav
By Titiksha Srivastav - Assistant Editor
7 Min Read

मुंबई क्राइम ब्रांच ने विदेश में नौकरी दिलाने के बहाने वहां लोगों से साइबर ठगी कराने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी जेरी फिलिप्स जैकब और गॉडफ्री थॉमस अल्वारेस मुंबई में बोरिवली के रहने वाले हैं। डीसीपी विशाल ठाकुर की अगुआई में एसीपी महेश देसाई और सीनियर इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत सालुंखे की टीम की टीम ने जाल बिछाकर इन दोनों आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी देश में अलग-अलग एजेंट्स के संपर्क में थे।

आशंका है कि इस गिरोह ने पिछले कुछ महीनों में चार सौ से ज्यादा लोगों को नौकरी के बहाने विदेश में भेजा और उन्हें साइबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया या उसकी ट्रेनिंग दी। एक अधिकारी के अनुसार अब तक 12 लोगों ने भारतीय दूतावास में शिकायत की है। इसी के आधार पर ही मुंबई पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

ALSO READ: Credit Card रखने वाले हो जाएं सावधान, एक गलती से हो सकता है अकाउंट खाली, ऐसे बचाएं खुदकों

सोशल मीडिया की मदद से लोगों के संपर्क में आते थे

अधिकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सोशल मीडिया की मदद से लोगों के संपर्क में आते थे। वे सोशल मीडिय पर विज्ञापन देते थे, जिसमें उनका सिर्फ मोबाइल नंबर होता था। किसी ऑफिस का पता वगैरह नहीं होता था। लोग इस विज्ञापन की मदद से इनसे संपर्क करते थे। वे लोगों थाईलैंड में कॉल सेंटर में जॉब का ऑफर देते थे। वर्क वीजा दिलाने का वादा करते, लेकिन टूरिस्ट वीजा पर बैंकॉक भेजते थे। फिर बैंकॉक एयरपोर्ट से लोगों को थाईलैंड में एक दूसरे एयरपोर्ट चियांग राय भेजा जाता था।

एयरपोर्ट से बाहर आने के बाद लोगों को टैक्सी से कहीं दूर ले जाया जाता था। वहां से नदी या सड़क के रास्ते इन्हों लाओस ले जाया जाता था। एक अन्य देश में भी इन्हें लेने की बात सामने आई है। क्राइम ब्रांच के अधिकारी के अनुसार, लाओस में अलग-अलग बिल्डिंग में कॉल सेंटर हैं। इसे चीन के नागरिक चला रहे हैं। इन कॉल सेंटर में इनसे विदेशी नागरिकों के साथ साइबर ठगी और धोखाधड़ी करने के लिए कहा जाता है।

लॉकडाउन के बाद आरोपी लाओस गए

क्राइम ब्रांच के अधिकारी के अनुसार लॉकडाउन के बाद आरोपी लाओस चले गए और वहां फर्जी कॉल सेंटर चलाने लगे। उन्होंने यूरोप, अमेरिका और कनाडा में लोगों को शिकार बनाने के लिए फर्जी कॉल कीं। उन्होंने नौकरियों की पेशकश की और विभिन्न राज्यों से भारतीयों को थाईलैंड में काम करने का लालच देकर काम पर रखा। लोगों के थाईलैंड पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट और फोन छीन लिए गए और उन्हें लाओस के गोल्डन ट्रायंगल इलाके में बंधक बनाकर रखा गया, जो अपराध का केंद्र है। जांच अभी जारी है क्योंकि वहां और भी पीड़ित फंसे हो सकते हैं।

आरोपियों ने 100 से अधिक लोगों को फंसाया

आधिकारिक तौर पर पुलिस ने केवल 12 पीड़ितों का मामला दर्ज किया है, लेकिन 100 से अधिक ऐसे हैं जिन्हें आरोपियों ने फंसाया है। यह अपराध तब सामने आया जब पीड़ितों में से एक ठाणे का निवासी सिद्धार्थ यादव (23) भागने में सफल रहे। वह लाओस में भारतीय दूतावास की मदद से भारत लौटें। होटल मैनेजमेंट में ग्रेजुएट सिद्धार्थ यादव ने विले पार्ले पुलिस में एइआईआर दर्ज कराई। यादव की शिकायत के अनुसार, दिसंबर 2022 में एक रिश्तेदार के माध्यम से नौकरी के लिए उनसे संपर्क किया गया था। उन्हें थाईलैंड में ₹65,000-75,000 प्रति माह के वेतन पर एक आकर्षक कॉल सेंटर नौकरी की पेशकश की गई थी।

ALSO READ: आपके पास तो नहीं आया मोबाइल को 4G से 5G में अपग्रेड करने का कॉल, अकाउंट खाली होने से पहले पढ़ लें पूरा सच

पासपोर्ट जब्त कर लिए गए

हालांकि, थाईलैंड के चियांग राय पहुंचने पर उन्हें अन्य पीड़ितों के साथ एक चीनी नागरिक द्वारा लाओस सीमा पर पहुंचा दिया गया था। उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें अवैध रूप से नाव से लाओस ले जाया गया। लाओस में गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र में पहुंचने पर यादव और उनके साथी पीड़ितों को दो भारतीय नागरिक मिले, जिनकी पहचान गॉडफ्रे और सनी के रूप में हुई, जिन्होंने उन्हें साइबर क्राइम ऑपरेशन में काम करने के लिए मजबूर किया।

मारपीट और धमकी

पीड़ितों को पश्चिमी देशों के लोगों को निशाना बनाने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के निर्देश दिए गए थे। उनका उद्देश्य ग्राहकों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए धोखा देना था। विरोध करने पर लोगों से मारपीट की गई और धमकी दी गई। वादे के मुताबिक उन्हें उनकी नौकरी के लिए भुगतान नहीं किया गया और उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया। उन्हें कहीं भी जाने की इजाजत नहीं थी। बाहरी दुनिया से अलग रखा जाता था और दिन में एक बार ही खाना दिया जाता था। उन्होंने अपने पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन अधिकांश असफल रहे।

5 भारतीय पीड़ितों को बचाया गया

दूतावास के हस्तक्षेप और लाओटियन पुलिस के दबाव के बाद, 5 भारतीय पीड़ितों को बचाया गया। जबकि कुछ को उनके पासपोर्ट जल्दी मिल गए। यादव की वापसी में देरी हुई क्योंकि वह अपने तस्कर के साथ बातचीत कर रहे थे, जिसने उनके पासपोर्ट के बदले में पैसे की मांग की थी। यादव के भारत पहुंचने के बाद वह तुरंत एक पुलिस स्टेशन पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई।

Follow The420.in on

 Telegram | Facebook | Twitter | LinkedIn | Instagram | YouTube

Stay Connected