डीपफेक टेक्नॉलजी का इस्तेमाल गलत काम के लिए लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को हो रहा, जिनकी फोटो या वीडियो को ‘न्यूड’ बनाकर वेबसाइट हिट्स कमाने के लिए कर रहे हैं। बड़ी समस्या यह बै कि साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स भी इस तकनीक आगे घुटने टेक चुके हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल सेलिब्रिटिज के फोटो व वीडियो को न्यूड में बदलने किया जा रहा था, लेकिन अब आम महिलाओं को भी निशाना बनाया जाने लगा है।

डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार एक वेबसाइट मशीन लर्निंग पर आधारित डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके सिनेमा सेलिब्रिटी और आम महिलाओं के फोटो को न्यूड बनाया जा रहा है। 2021 की शुरुआत से लेकर अब तक इस वेबसाइल 3.8 करोड़ हिट मिल चुके हैं। अकेले जून महीने में 50 लाख हिट्स मिले हैं। इस वेबसाइट का नाम दीपसुकेबे (Deepsukebe) है। इसका दावा है कि इसका मिशन ‘पुरुषों के सपनों को साकार करना है’। इसका ट्विटर पेज अब सस्पेंड हो चुका है। इसपर कंपनी ने खुद को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित न्यूडिफायर’ बताया था। फेसबुक ने इसे बैन कर रखा है।

हफिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इस बात का अभी तक पता नहीं चला है कि इस वेबसाइट के पीछे किसका हाथ है और वर्तनी (Spelling) और वाक्यविन्यास त्रुटियों (Syntax Errors) से भरा हुआ है। यह भी नहीं पता है कि इसका संचालन कहा से हो रहा है। पिछले महीने, इस वेबसाइट पर सबसे ज्यादा ट्रैफिक अमेरिका से देखने को मिला। इसके बाद थाईलैंड, ताइवान, जर्मनी और चीन का स्थान था।
यह तकनीक इतनी शक्तिशाली है कि दुनिया में ऐसी कोई महिला नहीं है, जो इससे सुरक्षित हो। लेकिन यह पुरुषों पर काम नहीं करती है। इस नए, “न्यूडिफायर” की तस्वीरें ट्विटर, फेसबुक, रेडिट, टेलीग्राम और अन्य प्रमुख प्लेटफार्मों पर काफी शेयर की गई हैं। बता दें कि इस तकनीक के बारे में सबसे पहले 2017 में पता चला था। इस दौरान डीपफेक नाम के ही रेडिट एकाउंट पर कुछ पोर्न क्लिप्स अपलोड कर दिए गए थे। इन क्लिप्स में हॉलीवुड की गल गैडोट, टेलर स्विफ्ट और स्कारलेट जॉनसन जैसी अभिनेत्रियों के चेहरों का इस्तेमाल किया गया था।
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