तमिलनाडु की चेन्नई पुलिस और स्थानीय खोजी दस्तों ने मैट्रिमोनियल वेबसाइटों के माध्यम से महिलाओं को अपना शिकार बनाने वाले एक अंतर-राज्यीय शातिर अपराधी के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है। तकनीकी सर्विलांस और पीड़ितों से मिले इनपुट के आधार पर, कोयंबेडु पुलिस ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर निवासी 35 वर्षीय हिस्ट्रीशीटर चेल्ला नारायणन को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। शादी का झांसा देकर महिलाओं का कीमती सोना और पूंजी लूटने वाले इस सिंडिकेट का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस अब इसके पूरे डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगाल रही है।
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झूठे दूल्हे का स्वांग और आभूषणों की चोरी की कार्यप्रणाली
इस पूरे आर्थिक और सामाजिक अपराध की रूपरेखा को अंजाम देने के लिए जालसाज ने डिजिटल मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म्स की कमियों और दूसरी शादी की इच्छा रखने वाली तलाकशुदा महिलाओं की भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने खुद को एक संभ्रांत और शादी के इच्छुक व्यक्ति के रूप में पेश करने के लिए कई फर्जी प्रोफाइल बना रखे थे।
इस शातिर अपराधी ने अपनी लूट की योजना को तीन लगातार परिचालन चरणों के माध्यम से संचालित किया:
आरोपी ने सबसे पहले मैट्रिमोनियल पोर्टल्स पर फार्मास्यूटिकल कंपनी में कार्यरत पीड़ित महिला से संपर्क साधा और लगभग एक महीने तक लगातार बातचीत कर खुद को एक आदर्श जीवनसाथी के रूप में स्थापित कर उसका विश्वास जीता।
दूसरे चरण में, 5 जुलाई को आरोपी ने महिला को चेन्नई बुलाया, जहां उसने कोयंबेडु के एक लॉज में ठहरने की व्यवस्था की। इसके बाद वह महिला को मामल्लापुरम के पास नित्या पेरुमल मंदिर ले गया और वहां आध्यात्मिक सुरक्षा तथा गहनों को सुरक्षित रखने के बहाने महिला के सारे आभूषण (सात ग्राम की चेन और दो सोने की अंगूठियां) अपने पास रख लिए।
अंतिम चरण तब पूरा हुआ जब दोनों वापस लॉज लौटे। वहां महिला के शौचालय जाने का फायदा उठाकर आरोपी सारा सोना लेकर फरार हो गया और अपने सभी डिजिटल संचार माध्यमों को बंद कर दिया।
आपराधिक इतिहास का खुलासा और समानांतर मामलों की कड़ियां
पीड़िता द्वारा कोयंबेडु पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के बाद, जब पुलिस ने आरोपी के फिंगरप्रिंट्स और नाम को केंद्रीय आपराधिक डेटाबेस (CCTNS) में डाला, तो एक चौंकाने वाला रिकॉर्ड सामने आया। जांच में पता चला कि आरोपी चेल्ला नारायणन कोई साधारण चोर नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश का एक घोषित हिस्ट्रीशीटर है, जिसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में हत्या, संगीन चोरी, जालसाजी और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत कई गंभीर मामले लंबित हैं।
पुलिस की तफ्तीश में यह भी सामने आया कि यह वारदात उसकी पहली घटना नहीं थी। वह 19 जून को दर्ज एक अन्य मामले में भी पुलिस की गिरफ्त से फरार चल रहा था, जिसमें उसने एक अन्य महिला को इसी तरह मैट्रिमोनियल जाल में फंसाकर उसके 44 ग्राम सोने के आभूषणों का गबन किया था। फरार रहने के दौरान ही उसने इस नई वारदात को अंजाम दिया।
मनी ट्रेल की जांच और तकनीकी साक्ष्यों का संकलन
चेन्नई पुलिस की विशेष टीमें अब आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल लॉग्स और मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स के चैट डेटा की फॉरेंसिक मैपिंग कर रही हैं। पुलिस को आशंका है कि इस संगठित ऑनलाइन शिकार सिंडिकेट के पीछे कई अन्य तकनीकी सहायक या हवाला ऑपरेटर भी हो सकते हैं जो लूटे गए सोने को बाजार में खपाने में आरोपी की मदद करते थे।
साइबर सेल की टीमें अब उन सभी बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स की जांच कर रही हैं जिनका उपयोग आरोपी अपनी पहचान छिपाने और यात्रा के दौरान लॉजिस्टिक्स के लिए कर रहा था। पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में उन सराफा व्यापारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है जिन्होंने आरोपी से बिना वैध रसीद के चोरी का सोना खरीदा था।
शून्य-विश्वास मैट्रिमोनियल सत्यापन और सुरक्षा सुधार
डिजिटल विवाह पोर्टल्स के माध्यम से सामने आई इस गंभीर धोखाधड़ी ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रोफाइल वेरिफिकेशन (सत्यापन) के मानकों को तुरंत अपग्रेड करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि केवल बुनियादी मोबाइल नंबर या स्व-घोषित विवरणों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पेशेवर अपराधी आसानी से अपनी पहचान बदलकर सीधे संवेदनशील नागरिकों तक पहुंच बना लेते हैं।
भविष्य में ऐसे मैट्रिमोनियल घोटालों को रोकने के लिए सुरक्षा विशेषज्ञ अब ‘शून्य-विश्वास’ (ज़ीरो-ट्रस्ट) प्रोफाइल सत्यापन प्रणालियों को अनिवार्य करने की सलाह दे रहे हैं। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी मैट्रिमोनियल वेबसाइट किसी भी यूजर की प्रोफाइल तब तक लाइव न करे, जब तक कि उसका रियल-टाइम सरकारी आईडी (जैसे पैन या पासपोर्ट) और आधिकारिक बैकग्राउंड वेरिफिकेशन पूरा न हो जाए। पुलिस ने आम जनता, विशेषकर महिलाओं से अपील की है कि वे किसी भी ऑनलाइन मिले व्यक्ति पर पूरी जांच के बिना भरोसा न करें और मुलाकात के शुरुआती चरणों में कभी भी अपने कीमती सामान या वित्तीय दस्तावेज किसी अजनबी को न सौंपें।
