डेटा सुरक्षित रखने में बीमा क्षेत्र की कंपनियों की लापरवाही के कारण भारत में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लाखों बीमा ग्राहकों का डेटा बिक रहा है जिसका उपयोग स्कैमर्स लोगों को ठगने के लिए कर रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने गुरुवार को एक ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने बीमा के नाम रक धोखाधड़ी के जरिए 50 करोड़ रुपये लोगों से ठगे हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि किस तरह से ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए प्रमुख निजी बीमा कंपनियों के डेटा का उपयोग कर रहे हैं।
गिरोह ने फर्जी कॉल करके लोगों को धोखा देने के लिए कॉल सेंटर बनाया। बीमा कंपनियों के लीक हुए डेटा का इस्तेमाल करके जालसाज लोगों को ठग रहे हैं। हर दिन हजारों लोगों को ठगा जा रहा है और देश भर में ऐसी धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। बीमा कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जो अपने ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असमर्थ हैं।
यूपी एसटीएफ ने साइबर ठगों के पास से श्रीराम इंश्योरेंस, भारती एक्सा, एचडीएफसी लाइफ, रिलायंस लाइफ, फ्यूचर जेनराली, एक्साइड लाइफ, बजाज लाइफ, एगॉन लाइफ, बिड़ला लाइफ आदि का डेटा बरामद किया है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए गिरोह के नौ सदस्य बीमा कंपनियों में ब्रोकर के तौर पर काम करते थे। साल 2018 में उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नोएडा में अपना फर्जी कॉल सेंटर खोला।
गिरोह ने कबूल किया कि वे विभिन्न बीमा कंपनियों के एजेंटों से अनधिकृत तरीके से पॉलिसीधारकों का डेटा खरीद रहे थे। यह डेटा उनके लिए काफी काम आता था। इससे उन्हें लोगों की निजी जानकारी मिल जाती थी और वे आराम से ठगी को अंजाम दे देते थे।
एसटीएफ की टीम अब गिरोह के पास से बरामद आंकड़ों का फोरेंसिक ऑडिट करने जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने The420.in को बताया कि ऑडिट इस बात का पता चलेगा कि डेटा लीक कैसे हुआ। कंपनियों का डेटा हैक किया गया या इसमें कर्मचारी मिले हुए थे या कोई और तरीका आजमाया गया।
बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) ने 2017 में साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश बनाए थे। हालांकि, साइबर बीमा मामलों में तेज वृद्धि के बावजूद बीमा कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) एक गैर-लाभकारी थिंक टैंक है, जो क्राइम डेटा, ट्रेंड्स और विश्लेषण में गहन शोध करता है। इसके शोधकर्ताओं ने डेटा संरक्षण और इसके उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि आईआरडीए क्या कर रहा है? पिछले डेटा लीक के मामलों में लाइसेंस रद्द या जुर्माना क्यों नहीं लगाया या बीमा कंपनियों के कारोबार पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया? डेटा लीक के स्रोतों का पता लगाने के लिए इन सभी बीमा कंपनियों का तत्काल फोरेंसिक ऑडिट क्यों किया जाता है। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाती है?
एफसीआरएफ ने कहा कि वित्त मंत्रालय/आईआरडीए को सुरक्षा खामियों का पता लगाने और सख्त कार्रवाई करने के लिए एक जांच समिति का गठन करना चाहिए। बीमा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने The420.in को बताया कि बीमाकर्ता कानूनी अनुपालन के लिए सिर्फ सूचना सुरक्षा प्रमाणपत्र खरीद रहे हैं। वे डेटा सुरक्षा को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
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